Last Updated: 04 Jul 2020 04:56 AM

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  • जितेंद्र की लंबी उम्र की दुआ मांग कर चली गईं सरोज खान, आखिरी बातचीत में सुनाए थे उनसे जुडे़ यादगार किस्से

    बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान इस दुनिया को अलविदा कह चली हैं। निधन से पहले उनसे आखिरी बार भास्कर की बातचीत 6 अप्रैल को हुई थी। बात करने का उद्देश्य 7 अप्रैल को आने वाला जितेंद्र का बर्थडे था। सरोज खान ने जितेंद्र के तमाम गाने कोरियोग्राफ किए हैं। उन्होंने जितेंद्र के जन्मदिन पर भर मुंह आशीर्वाद दिया था। कुछ इस तरह जैसे मांं अपने बेटे को जन्मदिन पर आशीर्वाद देती हो। इंडस्ट्री में पैर जमाने से लेकर जितेंद्र की फेवरेट बनने के बारे में उन्होंने कई दिलचस्प किस्से सुनाए।

    पहले सेलेब स्टूडेंट थे जितेंद्र

    मैं जब इंडस्ट्री में नई-नई आई थी, तब लोग मुझ पर भरोसा नहीं करते थे कि मैं डांस डायरेक्टर बन सकती हूं। तभी जितेंद्र का फेवरेट था- कमल मास्टर, जो कि मेरा ही स्टूडेंट था और उसने मुझसे ही 5 साल सीखा था। लेकिन लोगों को यह बात मालूम नहीं थी। मेरे मास्टर बी. सोहनलाल साहू के पास कमल मास्टर सीखने आए थे लेकिन वह लड़कों को नहीं सिखाते थे, क्योंकि वह लड़कों से धोखा खा चुके थे।

    तब सोहनलाल साहू कि मैं असिस्टेंट थी। उन्होंने मुझसे कहा कि कमल को तुम सिखाओ। फिर तो 5 साल तक मेरे हाथ के नीचे सीखा और बाद में हम दोनों पार्टनर्स बन गए। टाइटल में एक ही नाम आता था- कमल का। लेकिन कंपोज मैं करती थी और पिक्चराइज वह करने जाता था।

    पहली कामयाबी का नहीं मिला क्रेडिट

    एक पिक्चर जो वालिया मूवीटोन बना रहे थे- जिसमें तनुजा और संजीव कुमार थे। उसका गाना बहुत हिट हो गया। फिर तो लोग नेचुरली पूछने लगे कि यह गाना किसने किया। कमल मास्टर ने कहा कि मैंने किया। उन्होंने यह नहीं कहा कि मैं और सरोज, दोनों ने मिलकर किया। फिर तो उसका नाम हो गया और वह आगे निकल गया। बड़ी-बड़ी पिक्चरें करने लगा। जीतेंद्र का फेवरेट बन गया।

    उसी दौरान जितेंद्र का एक गाना था, जिसके लिए कमल नहीं मिल रहा था। उन्होंने एक मास्टर को बुलाया उनके साथ एक दिन पिक्चराइज किया। लेकिन बात नहीं बनी तो उनको निकाल दिया। दूसरे दिन एक और मास्टर बसंत नेपाली को पिक्चराइज करने के लिए बुलाया और उनको भी एक ही दिन में निकाल दिया। तीसरे दिन मुझको बुलाया गया। तब मैं सेट पर लड़के लड़कियों के साथ बस में गई। जब लोकेशन पर पहुंची, तब मैंने कहा कि पहले जितेंद्र से पूछ लीजिए कि वे मुझे वापस तो नहीं भेजेंगे। अगर नहीं भेजेंगे तो गाना पिक्चराइज करूं वरना नहीं करूं। जीतू खुद आकर बोले कि नहीं मास्टर मैं आपका ही गाना रखूंगा। फिर मैंने वह गाना उन्हें करके दिया।

    16 साल में किया था पहला गाना कोरियोग्राफ

    जितेंद्र को मेरा काम बहुत पसंद आया। फिर तो उनके साथ काम का सिलसिला ऐसा चला कि हमने बहुत सारी पिक्चरें साथ में कीं। उस पिक्चर का नाम तो याद नहीं है। तब मैं 16-17 साल की थी। क्योंकि मैं 14 साल में डांस डायरेक्टर बन गई थी। उनके साथ ज्यादातर मद्रास की पिक्चरें की, जिसमें उनके साथ श्रीदेवी फिल्म में हो, जयाप्रदा के साथ हो या रेखा और जितेंद्र की फिल्म हो।

    सीखने के मामले में जीतेंद्र बहुत स्मार्ट हैंः सरोज खान

    मैं सच बोलूं तो आज सेट पर के इतने सारे किस्से याद नहीं हैं। लेकिन आज भी वही मेरी बहुत रिस्पेक्ट करते हैं। कभी-कभार कोई गाना हो या टेलीविजन पर कुछ हो, तब मुझे बुलाते जरूर हैं। हां, इतना कहना चाहूंगी कि सीखने के मामले में जीतेंद्र बहुत स्मार्ट हैं। बहरहाल कल उनका बर्थडे है। मैं उन्हें दिल से दुआ देती हूं कि अल्लाह उनकी लंबी उम्र करें, खुशी दे, सेफ्टी दे, जो आज बीमारियां चल रही है, उनसे बचा कर रखें।



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    Saroj Khan went away praying for Jitendra's long life, the memorable stories related to him were told in the last conversation

  • अपने नए घर में शिफ्ट हुईं आमिर खान की बेटी इरा, लॉकडाउन में पिता के साथ बिता रही थीं समय

    लॉकडाउन के बाद से ही इरा खान अपने पिता और परिवार के साथ समय बिता रही थीं। मगर अब जब लॉकडाउन में छूट मिलने लगी है तो इरा भी जिंदगी की नई शुरुआत करने के लिए नए घर में शिफ्ट हो चुकी हैं। उनके नए घर की एक झलक भी सामने आई हैं जिसमें वो काफी क्यूट नजर आ रही हैं।

    इरा ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए नए घर में शिफ्ट होने की जानकारी दी है। उन्होंने अपने स्टडी डेस्क की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें वो वाइन बोतल सामने रखकर कुछ लिखते हुए और सोचते हुए दिख रही हैं। रूम को कुछ पुरानी पेंटिग्स और पोस्टर्स से सजाया गया है। इनमें से कुछ पोस्टर्स खुद इरा ने स्कूल के दिनों में तैयार किए थे। फिलहाल इरा बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर रही हैं।

    इन तस्वीरों को शेयर करते हए इरा लिखती हैं, 'मेरे नए घर को देखो,मूविंग आउट, मेरी जगह, पहली बार, नई शुरुआत। इससे पहले अब तक इरा अपने पिता आमिर खान, किरण राव और भाई आजाद के साथ शहर से दूरफार्महाउस में टाइम स्पेंड कर रही थीं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने कई तस्वीरें भी शेयर की हैं जिनमें वो कभी भाई तो कभी पिता के साथ मस्ती करती दिखीं।

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    लाइव वर्कआउट सेशन में आ गए थे आमिर

    हाल ही में इरा ने आमिर के पुराने फिटनेस ट्रेनर डेविड पॉजनिक के साथ लाइव सेशन किया था। इस दौरान आमिर अचानक ही फ्रेम में आ गए थे। उन्हें देखकर इरा भी कुछ देर के लिए रुक गई थीं हालांकि आमिर तुरंत ही चले भी गए थे। इसके अलावा भी इरा ने आमिर के साथ फादर्स डे में क्यूट फोटो शेयर कर उन्हें बधाई दी थी।

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    Aamir Khan's daughter Ira, shifted to her new home, was spending time with father in lockdown

  • फिल्मी सेट्स पर कलाकारों के साथ सरोज खान की थी बेहद अच्छी बॉन्डिंग, देखें अनसीन फोटोज

    बॉलीवुड की दिग्गज कोरियोग्राफर सरोज खान अब हमारे बीच नहीं हैं। गुरुवार की रात दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में उनका निधन हो गया। वे 71 साल की थीं और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं।40 साल से ज्यादा समय के अपने करियर में उन्होंने दो हजार से ज्यादा गानों और सैकड़ों स्टार्स को कोरियोग्राफ किया। श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, मीनाक्षी शेषाद्री, ऐश्वर्या राय समेत कई एक्ट्रेसेस उनके निर्देशन में थिरकती नजर आईं और इन स्टार्स की सफलता का बड़ा क्रेडिट सरोज खान को भी जाता है। बॉलीवुड स्टार्स उन्हें प्यार से मास्टरजी कहकर बुलाते थे।

    सरोज खान का जन्म 22 नवंबर 1948 को किशनचंद संधू सिंह और नोनी संधू सिंह के घर पर हुआ था। उनका असली नाम निर्मला था, उनके जन्म के बाद उनका परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया था। (श्रीदेवी और शेखर कपूर के साथ सरोज खान)
    सरोज खान ने तीन साल की उम्र में फिल्म 'नजराना' में बाल कलाकार के रूप में काम शुरू किया था। इस फिल्म में वे श्यामा के रूप में नजर आई थीं। (फोटो में माधुरी के साथ सरोज खान)
    जब सरोज 13 साल की हुईं तो प्रसिद्ध शास्त्रीय नर्तक और कोरियोग्राफरसोहनलाल की असिस्टेंट बन गईं। जिनके साथ रहकर सरोज ने अपनी कला को और निखारा। (फोटो में श्रीदेवी के साथ सरोज खान)
    सोहनलाल के साथ काम करते हुए सरोज उन्हें दिल दे बैठीं, और फिर दोनों ने शादी कर ली। उस वक्त सरोज की उम्र सिर्फ 13 साल थी, जबकिसोहनलाल 41 साल के थे और पहले से शादीशुदा होने के साथ ही 4 बच्चों के पिता भी थे। इसके सालभर बाद ही सरोज मां भी बन गईं। (फोटो में शाहरुख खान के साथ सरोज खान)
    50 के दशक में सरोज ने बैकग्राउंड डांसर के रूप में नई पारी की शुरुआत की। (फोटो में माधुरी और सरोज खान)
    उधर पति से हुए विवाद के बाद1965 में वे उनसे अलग हो गईं, हालांकिपति को आए हार्ट अटैक के बाद ये दोनों फिर एक हो गए। (फोटो में श्रीदेवी के साथ सरोज)
    सोहनलाल कुछ वक्त बाद सरोज और उनके दो बच्चों को छोड़कर मद्रास (चेन्नई) चले गए थे, जिसके बाद उन्होंने सरदार रोशन खान से शादी कर ली थी।एक इंटरव्यू में सरोज ने बताया था कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कुबूल किया था। (फोटो में माधुरी की साथ सरोज)
    कुछ सालों तक बतौर बैकग्राउंड डांसर काम करने के बाद सरोजअसिस्टेंट डायरेक्टर बनीं और 1974 में आई फिल्म 'गीता मेरा नाम' से उन्हें बतौर स्वतंत्र कोरियोग्राफर पहला ब्रेक मिला था। उस फिल्म में हेमामालिनी लीड रोल में थीं। (फोटो में यश चोपड़ा और श्रीदेवी के साथ सरोज)
    अपने करियर में सरोज ने करीब 2 हजार से ज्यादा गानों को कोरियोग्राफ किया, जिसके चलते कोरियोग्राफी के मामले में उन्हें 'मदर ऑफ डांस' भी कहा जाता है।


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    Photo gallery of Saroj Khan unseen photos of Mother of Dance with Bollywood stars

  • छोटी बेटी सुकैना ने कहा, 'वो मां और पिता दोनों का रोल निभाती थीं, मर्दों की तरह घर की सारी जिम्मेदारियां उठाईं'

    3 जुलाई कोबॉलीवुड की जानी-मानी कोरियोग्राफर सरोज खान का निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने की वजह से उन्होंने 71 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। सरोज खान की मौत से फिल्म इंडस्ट्री को तगड़ा झटका लगा। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में 41 साल काम किया था। इस दौरान सरोज जी ने अपनी जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव देखे। सरोज जी के सफर पर उनकी छोटी बेटी सुकैना ने एक इंटरव्यू में कई सारी बातें कही हैं।

    बेटी ने किया मां को याद:अपनी मां को याद करते हुए बेटी सुकैना ने पिंकविला से बातचीत में कहा, 'मेरी मां हीरो थीं। उनका मेरी जिंदगी पर सबसे ज्यादा प्रभाव था। वो मेरे लिए माता और पिता दोनों का रोल निभाती थीं। वह मुझपर सख्त तो नहीं थीं लेकिन मुझसे परफेक्शन की उम्मीद करती थीं।'

    सुकैना आगे बोलीं, 'मैंसबसे छोटी थी इसलिए उनका प्यार सबसे ज्यादा मिला। मेरी मां फाइटर थीं। 13 साल की उम्र से लेकर 71 साल तक उन्होंने हमें बेहतरीन जिंदगी देने के लिए सब कुछ किया। उन्होंने कभी कोई शिकायत नहीं की और घर के मर्द की तरह हर जिम्मेदारी उठाई।'

    अकेले की बच्चों की परवरिश:सरोज जी की 13 साल की उम्र में शादी हो गई थी और 14 साल की उम्र में वह मां बन गई थीं। उनकी शादी ज्यादा नहीं चल पाई और फिर उन्होंने अकेले ही बच्चों की परवरिश की।

    सुकैना ने इस बारे में कहा, 'हर महिला इस बात से इत्तेफाक रखेगी कि बच्चों को अकेले बड़ा करना बहुत बड़ी चुनौती है। इसके साथ ही जब घर के बाकी सदस्य भी आप पर निर्भर हों तो मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। लेकिन, मां के चेहरे पर एक शिकन तक नहीं आती थी। वह कहती थीं, मैं हूं ना। हो जाएगा। वह कभी भी कोई परेशानी आने पर घबराती नहीं थीं और ये नहीं कहती थीं कि मैं नहीं कर सकती। उन्होंने हमेशा हमें आगे ही बढ़ाया।'

    रिकवर कर रही थीं सरोज: सुकैना ने सरोज जी की हेल्थ के बारे में बताते हुए कहा, उन्हें सांस लेने में तकलीफ के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। कल रात तक उनकी सेहत में सुधार भी हो रहा था लेकिन फिर डायबिटीज का स्तर काफी बढ़ गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की काफी कोशिश की लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा हो न सका।



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    Saroj Khan's youngest daughter Sukaina remembers her fighter mother

  • 5 जुलाई के बाद 2038 में होगा गुरु पूर्णिमा पर मांद्य चंद्र ग्रहण, रविवार को अमेरिका और अफ्रीका में दिखेगी चंद्र के ऊपर धूल जैसी परत

    5 जुलाई 2020 को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस बार गुरु पूर्णिमा पर राहु मिथनु राशि में सूर्य के साथ, केतु धनु राशि में चंद्र-गुरु के साथ रहेगा और मांद्य चंद्र ग्रहण होगा। इसे उपच्छाया और पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण कहते हैं। भारतीय समय के अनुसार रविवार सुबह 8.37 बजे से 11.22 बजे तक रहेगा। ये ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, लेकिन अमेरिका और अफ्रीका में चंद्र के ऊपर धूल जैसी परत दिखाई देगी।

    उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार मांद्य चंद्र ग्रहण का किसी भी प्रकार का धार्मिक असर नहीं रहता है। इसका सूतक भी नहीं होगा। गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का योग 19 साल पहले 5 जुलाई 2001 को बना था। उस दिन भी गुरु पूर्णिमा पर सूर्य-राहु मिथुन राशि में थे और साथ में गुरु भी था। धनु राशि में केवल चंद्र-केतु थे। 2020 वाला चंद्र ग्रहण मांद्य है, जबकि 2001 में आंशिक चंद्र ग्रहण हुआ था। आंशिक चंद्र ग्रहण में सभी नियम मान्य होते हैं।

    अब 18 साल गुरु पूर्णिमा पर होगा मांद्य चंद्र ग्रहण

    2020 के बाद 16 जुलाई 2038 में यानी 18 साल बाद इसी तरह का योग बनेगा। उस समय भी सूर्य-राहु की मिथुन राशि में, चंद्र-केतु की युति धनु राशि में होगी और गुरु पूर्णिमा पर मांद्य चंद्र ग्रहण होगा।

    किसे कहते हैं उपच्छाया ग्रहण?

    ये मांद्य यानी उपच्छाया चंद्र ग्रहण है। मांद्य का अर्थ है न्यूनतम यानी मंद होने की क्रिया। इसलिए इस चंद्र ग्रहण को लेकर सूतक नहीं रहेगा। इसका किसी भी तरह का धार्मिक असर नहीं होगा। इस ग्रहण में चंद्र के आगे पृथ्वी की धूल जैसी छाया रहेगी। ये ग्रहण विशेष उपकरणों से आसानी से समझा जा सकेगा।



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    Pnenumebral lunar eclipse, lunar eclipse 2020, chandra grahan 2020, chandra grahan on 5 July

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